सपा ने मनाई डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती एवं क्रांति के दूत जगदेव प्रसाद कुशवाहा की पुण्यतिथि
- शिक्षकों को सम्मान पत्र देकर किया गया सम्मानित
मिर्जापुर। सपा के जिला कार्यालय लोहिया ट्रस्ट में पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न प्रख्यात दार्शनिक डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती एवं क्रांति के दूत जगदेव प्रसाद कुशवाहा की पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर उनके चित्रों पर माल्यार्पण कर उनके किये गये कार्यो के बारे में चर्चा की गई।
इस अवसर पर सपा जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने कहा पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक थे, जिन्होंने अपने जीवन के चालीस वर्षों तक पढ़ाने का कार्य किया। वे देश के पहले उप-राष्ट्रपति और स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे थे। उन्होंने सन् 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वे कहते थे- देश में सर्वश्रेष्ठ दिमाग वालों को ही शिक्षक होना चाहिए।
शिक्षक सभा के जिलाध्यक्ष डॉ0 रतन सिंह पटेल ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कई किताबें भी लिखीं हैं, जिनमें धर्म और समाज, भारत और विश्व, गौतम बुद्ध जीवन और दर्शन उनकी प्रमुख किताबें हैं।
दुनिया भर के सौ से अधिक देशों में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह यादव ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा ऐसे महापुरूष थे जिन्होने तमाम कुरूतियों का सामना करते हुये देश में रहने वाले लोगों के विकास के लिये तमाम लड़ाईयों लड़ने का काम किया। बिहार में जन्मे जगदेव प्रसाद आज भारत के लेनिन नाम से जाने जाते है। इनका परिवार अत्यन्त निर्धन थे। इनके पिता प्रयाग नारायण कुशवाहा अत्यन्त गरीब अध्यापक थे। इनकी माता रासकली अत्यन्त गरीब गृहणी थी। वे बचपन से ज्योतिबाबाईफूले, डॉ0 अम्बेडकर आदि के विचारों से प्रेरित थे। उन्होने अपने क्रांतिकारी विचारों के बल पर दबे, कुचले लोगों को सही राह दिखाई।
बैठक में पूर्व विधायक जगतम्बा सिंह पटेल, राजेन्द्र सिंह पटेल, कीर्ति कोल, रविन्द्र बहादुर सिंह, आशीष यादव, मुन्नी यादव, सुरेन्द्र सिंह पटेल, कीर्ति कोल, राजेश भारती, संतोष गोयल, आदर्श यादव, राणा प्रताप सिंह, झल्लू यादव, जैन कुशवाहा, रामजी मौर्या, सत्यप्रकाश यादव, हरिशंकर यादव, आशीष राय, मेवालाल प्रजापति, दिनेश यादव, लाल बहादुर यादव, कन्हैया यादव, रामगोपाल बिन्द, दुर्गा बिन्द, विजय पटेल, डॉ0 शक्ति श्रीवास्तव, रंजीत फौजी, बलराम यादव, रामजी बिन्द आदि मौजूद रहे।
